पीजीटी समाज शास्त्र

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समाज शास्त्र का विकास, परिभाषा एवं विषय- क्षेत्र 

समाज शास्त्र का विकास, परिभाषा एवं विषय – क्षेत्र का तात्पर्य यह है कि,

अगर आप उत्तर – प्रदेश    माध्यमिक शिक्षा, सेवा चयन बोर्ड, इलाहाबाद द्वारा,

आयोजित होने वाली परीक्षा पीजीटी समाज

शास्त्र के परीक्षार्थी हैं तो आपके लिए यह सबसे अहम चैप्टर है।

आइए चलते हैं इस चैप्टर की गहराई में और देखते

हैं कि प्रवक्ता या पीजीटी समाज शास्त्र के पेपर में इसका क्यों और कितना महत्वपूर्ण स्थान है? 

समाज शास्त्र कैसा विषय है 

समाज शास्त्र एक अर्वाचीन सामाजिक विज्ञान है

यह समाज का क्रम बद्ध अध्ययन करने वाला एक सामाजिक विज्ञान भी कहा जा सकता है।

समाज शास्त्र को जन्म देने का श्रेय फ्रांस के एक प्रसिद्ध समाज शास्त्री आगस्ट काम्टे को जाता है।

काम्टे नेे ही 1838 में इस नवीन शास्त्र को समाज शास्त्र नाम दिया था।

इसीलिए इन्हें समाज शास्त्र का जनक कहा जाता है।

समाज शास्त्र विषय का एक प्रथक विषय के रुप में अध्ययन,

सबसे पहले अमेरिका के येल विश्वविद्यालय में ही 1876 में प्रारंभ हुआ था। 

समाज शास्त्र का अंग्रेजी रूपांतरण Sociology

होता है जो socio और logas दो शब्दों से मिलके बना है।

इनमें socius लैटिन भाषा का शब्द है और logas ग्रीक भाषा का शब्द है।

socius का अर्थ समाज तथा logus का अर्थ ज्ञान होता है।

इस तरह समाज शास्त्र का अर्थ समाज का शास्त्र या समाज का विज्ञान होता है। 

समाज शास्त्र यानी सोशल फिजिक्स 

समाज शास्त्र को सर्व प्रथम आगस्ट काम्टे ने ही सोशल फिजिक्स कहा था।

जबकि जान स्टुअर्ट मिल ने इसे सोशियोलाजी के स्थान पर इथोलाजी कहने का सुझाव दिया था।

जान स्टुअर्ट मिल का यह भी कहना था कि यह सोशियोलाजी,

दो भिन्न भिन्न शब्दों से मिलकर बनी हुई एकअवैध संतान है।

अगर हम समाज शास्त्र के एक व्यवस्थित क्रमिक अध्ययन की बात करें,

तो इसका श्रेय 19 वीं सदी के उत्तरार्ध में सोशियो –

लाजी नामक पुस्तक लिखने वाले हरबर्ट स्पेंसर को जाता है।

समाज शास्त्र की कुछ विशेष परिभाषाएं 

🔴एल एफ वार्ड के अनुसार समाज शास्त्र समाज का विज्ञान है।

🔴गिडिंग्स के अनुसार समाज शास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है।

🔴ओडम के अनुसार समाज शास्त्र वह विज्ञान है जो समाज का अध्ययन करता है।

🔴मैकाइवर एवं पेज के अनुसार समाज शास्त्र

सामाजिक संबंधों के विषय में है और संबंधों के इसी जाल को सामाज कहते हैं।

🔴मैक्स वेबर के अनुसार समाज शास्त्र प्रधानतः सामाजिक संबंधों तथा कृत्यों का अध्ययन है।

🔴वानवीज के अनुसार सामाजिक संबंध ही

समाज शास्त्र की विषय वस्तु का वास्तविक आधार है।

🔴आगस्ट काम्टे के अनुसार समाज शास्त्र सामाजिक व्यवस्था और प्रगति का विज्ञान है।

🔴किम्बाल यंग के अनुसार समाज शास्त्र समूहों में मनुष्य के व्यवहारों का वर्णन करता है।

🔴किंग्सले डेविस के अनुसार समाज शास्त्र समाज का एक सामान्य विज्ञान है।

🔴टानीज के अनुसार समाज शास्त्र एक तार्किक प्रयोगात्मक विज्ञान है।

🔴दुर्खीम के अनुसार समाज शास्त्र सामूहिक प्रतिनिधित्व का विज्ञान है। 

धन्यवाद

KPSINGH29062018

 

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