गैर कानूनी बंधन यानी बाल विवाह

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गैर कानूनी बंधन यानी बाल विवाह

गैर कानूनी बंधन यानी बाल विवाह पर कुछ और जानने के पहले,

आइए जानते हैं कि आखिर बाल विवाह क्या है?

●कम से कम भारत में बाल विवाह उसे कहते हैं जब 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की तथा 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह किया जाता है ।

●पूरी दुनिया की बात करें तो देश काल और परिस्थिति के अनुसार बाल विवाह का अर्थ और परिभाषा तय की जाती है ।

●फिर भी एक सर्वमान्य परिभाषा के अनुसार बाल विवाह वह विवाह है जो मानक से कम उम्र के लड़के लड़कियों के बीच सम्पन्न होता है ।

बाल विवाह और भारत

भारत में बाल विवाह गैरकानूनी है फिर भी प्रचलन में नहीं है ऐसा भी नही है ।

भारत में सर्वाधिक बाल विवाह की शिकायत मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से प्राप्त होती हैं ।

एक सर्वेक्षण कहता है कि भारत में आज भी 47%लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में कर दी जाती है ।

जहां तक बात भारत के शहर और ग्रामीण इलाके की बात है तो,

शहर के मुकाबिल गांव में दो गुने बाल विवाह होते हैं ।

पूरी दुनिया का हाल क्या है

जहां तक गैरकानूनी बंधन यानी बाल विवाह की बात है ,

तो पूरी दुनिया में प्रति वर्ष डेढ लाख नाबालिग लड़कियों की शादी यानी बाल विवाह होते हैं ।

जहां तक इनके रोक थाम की बात है तो यद्यपि प्रयास होते हैं इन्हें रोकने के,

लेकिन फिर भी यह पूरी तरह नही रोके जा पाते ।

भारत से आई है एक सुखद रिपोर्ट

इसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का तोहफा कहें या कुछ और,

अचानक एक सुखद रिपोर्ट आई है ।

विशेषकर भारत में बाल विवाह के रोकने के प्रयास पर।

जी हां ,यूनिसेफ के अनुसार भारत ने बाल विवाह के क्षेत्र में काफी बड़ी सफलता प्राप्त की है ।

एक दशक पहले जहां भारत में 47%से भी ज्यादा बाल विवाह होते थे वह अब घटकर 27%बचे हैं ।

पिछले एक दशक में पूरी दुनिया में ढाई लाख बाल विवाह रोके गए हैं ,

जिनमें इसका पचास प्रतिशत केवल भारत में रोके गए हैं ।

भारत की प्रगति क्यों है विशेष

चूंकि पूरी दुनिया की कुल किशोर आबादी का भारत में 20%रहता है ,

इस लिहाज से सर्वाधिक बाल विवाह पूरे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में यहीं होते हैं ।

भारत की वर्तमान बाल विवाह स्थिति यह है कि यहां बाल विवाह की शिकार कुल लड़कियों की संख्या 8 करोड़ 52 लाख है ।

इतनी बड़ी संख्या के बाद भी भारत बाल विवाह रोकने में सफल रहा यह सुखद है ।

सर्वाधिक सुधार भारत में

सन 2006 और 2016 के स्वास्थ्य सर्वेक्षण ,

और 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार ,

भारत में बाल विवाह की संख्या 47%से घटकर 27%रह गई है ।

यह एक उपलब्धि है ।

इसके कारणों की पड़ताल करें तो पता चलता है कि भारत में बाल विवाह को लेकर बनाए गए कड़े कानूनों की बदौलत ही यह सुखद बदलाव आया है ।

भारत में ऐसे विवाह करने की कोशिश करने वाले तक को बख्शा नही जाता यह इसी का परिणाम है ।

नाबालिग पत्नी के साथ सम्बंध बनाना भी चूंकि सुप्रीम कोर्ट से नाजायज करार किया गया है ,

फल स्वरूप लोग बाल विवाह से सचमुच तौबा करने लगे हैं ।

यूनिसेफ की प्रमुख जेंडर सलाहकार अंजू मल्होत्रा के अनुसार ,

बाल विवाह के चलते लड़कियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाताहै ,

अतः कुछ भी करके बाल विवाह को रोकना सबसे बड़ी बात है ।

धन्यवाद

लेखक :

के पी सिंह “किर्तीखेड़ा “

06032018

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