ओम जै जगदीश हरे ,प्रभु जै जगदीश हरे

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ओम जै जगदीश हरे प्रभु जै जगदीश हरे 

ओम जै जगदीश हरे, प्रभु जै जगदीश हरे दोस्तों यह आरती पूरे भारत में गायी जाती है ।

विशेषकर उत्तर भारतीय राज्यों में जहां भगवान् शिव, ब्रह्मा, विष्णु, राम, कृष्ण आदि देवताओं को हिंदूधर्म मानने वाले पूजते हैं ।

मैं यहां इस आरती की चर्चा इस लिए करना चाहता हूं कि,

लोग इस आरती को गाते हैं, भगवान् की आराधना में इसे प्रयोग करते हैं,

इसी के सहारे संसार के भवसागर को पार भी करना चाहते हैं ,

लेकिन इस महत्वपूर्ण आरती को किसने लिखा है यह शायद ही जानते हों ।

जी हांदोस्तों इस प्रसिद्ध आरती को किसने लिखा है यही बताना इस लेख का मकसद है ।

किसने लिखी यह आरती? 

 

इस प्रसिद्ध हिन्दू आरती को किसने लिखा यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है ,

क्योंकि जिसने भी इस आरती को लिखा है ,

उसे शायद ही इस बात का कभी अंदाजा रहा हो

कि एक दिन ऐसा भी इस देश में आएगा कि

यह एक मात्र आरती ही, लिखने वाले को अमर बना देगी ।

इस प्रसिद्ध आरती को रचने वाले रचयिता का नाम है पंडित श्रृद्धा राम फिललौरी ।

इन्होने ही इस महान आरती को आज से 100 साल पहले लिखा था ।

यह आरती आज भी उतनी ही सार्थकता रखती है ,

जितनी सौ साल पहले रखती थी ।इसमें किसी को कोई शक नहीं है ।

कौन हैं पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी 

 

पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी का जन्म 30 सितम्बर 1837 को पंजाब के जालंधर जिले में, फिल्लौर कस्बे में हुआ था ।

इसे इनकी खराब किस्मत कहें या बदकिस्मती कि इन्हें अपने किशोर में ही पारिवारिक भरण की जिम्मेदारी निभानी पड़ी ।

इन्हें जीविकोपार्जन हेतु कथावाचक बनना पड़ा ।

यह महाभारत की कथा का वाचन इतनी सुन्दरता से करते थे कि सभी लोग जल्द ही इन्हें चाहने लगे थे ।

लेकिन पंडित जी की खुशी शायद प्रकृति को भी मंजूर न थी ।

इन्हें देशभक्ति के कीड़े ने इस कदर काटा कि यह भारत की आजादी के दीवाने हो गए और लोगों में देश भक्ति का जज्बा भरने लगे ।

1865 में जब वह केवल 28 वर्ष के थे ।तभी इनकी पूरी खबर अंग्रेजी सरकार तक जा पहुंची ।

फिर क्या था पंडित जी को अंग्रेजी सरकार ने “शहर बदर” कर दिया ।

लेकिन पंडितजी इससे टूटे नहीं बल्कि जब सजा पूरी करके आए तो बिल्कुल इन्कलाब बन कर आए ।

फर्क इतना था कि पहले सिर्फ भाषण देते थे अब पूरे समय समाज सुधार का काम करने लगे ।

फिल्लौरी के अद्भुत कार्य

 

 

आज से करीब दो सौ साल पहले फिल्लौरी अपनी समाज सेवा में क्या करते थे सुनेंगे तो आप चौंक जाएंगे ।

आप को हो सकता है पहली बार अपने कानों में विश्वास न हो या फिर दूसरी बार मेरी बात पर विश्वास न हो ।

लेकिन सच यही है कि जो बताने जा रहे हैं उसे सुनकर आप हिल जाएंगे और

यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर यह कथा वाचक

 दो सौ साल पहले इतनी अद्भुत सोच कैसे रखता था ।

दोस्तों आज से करीब दो सौ साल पहले पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी

“बेटा बेटी एक समान”

और “कन्या भ्रूण हत्या” के खिलाफ आवाज उठाते थे ।

आप खुद कल्पना करिए आज पूरा सरकारी अमला इस मुहिम को आगे बढाने में गला रहता है ,

फिर भी लोग कुछ नहीं सीखते ,समझतेऔर कहां ,

पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी का अकेला प्रयास ।

धन्य है आज से इतने सालों पहले ऐसी दूरगामी सोच रखने वाले ।

फिल्लौरी और साहित्य 

पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी यानी आरती ओम जै  जगदीश हरे के लेखक की अभी आपने चौकाने वाली कहानी सुनी है।

अब इसके आगे की कहानी भी उससे कम रोचक नहीं है ।

क्योंकि पंडित जी एक साहित्यकार भी थे और केवल नाम के साहित्यकार नहीं बल्कि आप इन्हें बेहद काम वाला साहित्यकार  कह सकते हैं ।

क्यों कि पंडित जी ने हिन्दी का पहला उपन्यास “भाग्यवती” लिखा था ।

हालांकि इस बात को कुछ लोग स्वीकृति देते हैं तो कुछ नहीं ।

लेकिन सबसे कमाल की बात यह है कि इसी दौरान इन्होने यह प्रसिद्ध आरती ओम जै जगदीश हरे लिखी थी ।

इतने महान होने के बाद भी आरती ओम जै जगदीश हरे के लेखक

पंडित श्रृद्धा राम फिल्लौरी ज्यादा दिन तक नहीं जी पाए

और केवल 43 वर्ष की उम्र में 24 जून 1881 इनकी मृत्यु हो गई ।

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 29072018

 

 

 

 

5 COMMENTS

  1. अद्भुत ,आश्चर्यजनक,अविश्वसनीय, जानकारी मिली। आजतक किसी ने भी न ये सुना न कही पढ़ा। किसी भी आरती या भजन में लेखक या गायक आखिरी लाइन में अपना भोग लगाता है। इस आरती में, ” कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे” का ही पढ़ते आये हैं। जो भी है पण्डित श्रद्धाराम जी के कार्य सराहनीय व पूज्यनीय हैं।

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