एल आर एस किसे कहते हैं?

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एल आर एस किसे कहते हैं? 

एल आर एस किसे कहते हैं? दोस्तों यह बेहद ही खास सवाल है।

इस सवाल का जवाब इसलिए भी जरूरी क्यों कि

अगर आपको इस सवाल का जवाब मिल गया तो आपको एक नहीँ,

अनेकों सवालों के जवाब खुद ब खुद मिलजाएंगे।

दोस्तों आपने पिछले हफ्ते की इस खबर को जरूर पढा होगा,

जिसमें यह कहा गया था कि 2017 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि,

50 फीसदी  बढकर 7000 करोड़ रुपए हो गई है।

जब भारत सरकार की तरफ लोगों की सवालिया निगाहें उठीं तो,

सरकार ने स्पस्ट करते हुए बताया कि स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा राशि में,

40 फीसदी हिस्सा एल आर एस के तहत देश से बाहर भेजी गई मुद्रा का है।

एल आर एस का मतलब 

एलआर एस का पूरा नाम लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम होता है।

आप लोग ध्यान दें अंग्रेजी भाषा में रेमिटेंस शब्द का तात्पर्य होता है,

किसी देश के बाहर धन को भेजना।

आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में एक करोड़ से अधिक अनिवासी भारतीय विदेश में रहते हैं।

इसी तरह हमारे देश से बड़ी संख्या में लोग अपने

बच्चों को जब पढने के लिए विदेश भेजते हैं वे सभी अपने बच्चों को विदेश में पैसा भेजते हैं।

कुछ लोग इलाज या फिर कारोबार के सिल में अपने देश से बाहर जाते हैं।

इन सभी गतिविधियों में विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है।  

इस तरह की सभी राशि रेमिटेंस की श्रेणी में आती है।

विदेशी मुद्रा और कानून 

दोस्तों एल आर एस के बारे में कुछ और जानने से पहले हमें यह भी जानना है कि,

हर देश अपने यहांसे विदेशी मुद्रा बाह ले जाने पर कुछ न कुछ नियंत्रण रखता है।

जहां तक बात भारत की है तो 14 साल पहले यहां भी ऐसा ही था।

तब विदेशी मुद्रा बाहर ले जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी।

लेकिन यह ध्यान रखने वाली बात है कि 2004 में रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने छूट दे दी थी।

रिजर्व बैंक ने एक स्कीम शुरू कर दिया जिसका नाम था लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम। 

लिबर्लाइज्ड रेम स्कीम 

इस स्कीम के तहत विदेशी मुद्रा को देश से बाहर

भेजने के लिए पूर्वानुमति की कतई जरूरत नहीं थी।

इस योजना के तहत भारत के निवासी चाहे वे वयस्क हों या अवयस्क, 

एक वित्त वर्ष में कुल ढाई लाख डॉलर या फिर

पौने दो करोड़ रुपए तक की विदेशी मुद्रा बाहर भेज सकते हैं।

इस योजना का प्रारंभ 4 फरवरी 2004 को हुआ था।

इसके पहले मात्र 25 हजार डॉलर ही विदेशी मुद्रा को आप बाहर भेज सकते थे। 

योजना के बाद 

इस योजना की शुरुआत के बाद देश की आर्थिक

स्थिति को देखते हुए कई बार इसकी यानी विदेशी मुद्रा बाहर भेजने की सीमा घटाई बढाई गई है।

14 अगस्त 2013 को इसकी सीमा दो लाख से घटाकर 75 हजार डॉलर कर दी गई थी।

इसके अलावा यह नियम भी बना जिसके अनुसार आप विदेश में, 

अचल संपत्ति खरीदने के लिए इस तरह की राशि का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

लेकिन बाद में इसे एक बार फिर ढाई लाख डॉलर प्रति वित्त वर्ष कर दिया गया था। 

बेहद जरूरी है आपके लिए पैन नंबर 

जी हां दोस्तों, इस योजना का लाभ आपको तभी

मिल सकता है जब आपके पास आपका अपना पैन नंबर होगा।

इससे आपको विदेशी मुद्रा को बाहर भेजने में बड़ी आसानी होगी।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत, 

विदेशी मुद्रा बाहर भेजने के लिए किसी पूर्वानुमति की जरूरत नहीं होती।

इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति विदेश में पढाई करने के लिए,

विदेशी यात्रा करने के लिए उपहार या दान देने के लिए,

विदेश में बसे रिश्तेदारों को पैसा भेजने के लिए व

विदेश में इलाज के लिए जैसे कामों में पैसा भेजा जा सकता है। 

इससे आप क्या नहीं कर सकते हैं 

आप इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं लेकिन

कुछ काम आप इससे नहीं भी कर सकते।

आप इस राशि से विदेश में लाटरी का टिकट नहीं खरीद सकते हैं।

आप इससे मुद्रा का कारोबार नहीं कर सकते हैं।

साथ ही फाइनेंसल एक्शन टास्क फोर्स ने जिन

देशों को नान कोआपरेटिव की श्रेणी में रखा है

उनके साथ या उनके यहां इस स्कीम के तहत पैसा

नहीं भेजा जा सकता। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 03072018 

 

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